Friday, December 23, 2016


कितनी ही बार हमारे दिल में  बातें अनकही रह जाती हैं और उनको बयां करने में उम्र गुज़र जाती है. हाँ ये यकीनन तय है कि जब कोई हमसे दूर  हो जाता है , चाहें रूठ कर या फिर नियति के हाथों दूसरी दुनिया में जाकर, तो शायद कहीं कुछ अधूरा सा, कोई खलिश, कोई चाह जो कह जाती है.... 

शिकवे, शिकायतें सब यहीं रह जाएँगी
मेरे जाने के बाद बस मेरी रुस्वाइयाँ रह जाएँगी
अचानक देख के किसी में मेरी कोई झलक
तेरी आँखों में मेरी याद की खामोशियाँ रह जाएँगी
और जब तारों से बातें करते हुए बंद हो जाएँगी पलकें
तेरी रातों में मेरी महक की परछाईयाँ रह जाएँगी
यकीन मानो, शिकवे, शिकायतें सब यहीं रह जाएँगी
तो बस याद न करना कभी मुझे दिल को थाम कर
नहीं तो तेरी मेरी साँसों में तन्हाईयाँ रह जाएँगी
मेरे जाने के बाद बस मेरी रुस्वाइयाँ रह जाएँगी.....




2 comments:

  1. do u wish to publish book?
    www.bookbazooka.com

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    1. i wish to but not self publishing. My first book has already been published through educreation. thanks for the offer though.

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